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रविवार, 31 अगस्त 2008
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मजाज़ लखनवी की एक रूमानी गज़ल

आज एक अरसे बाद चिट्ठे की ओर रुख करने का मौका मिला. कोशिश है कि आगे इतना लंबा अंतराल न हो. तो आइये, टूटे सिरे को फिर जोड़ते हुये आज बात करते ह...

बुधवार, 16 अप्रैल 2008
असाध्य वीणा : अज्ञेय

असाध्य वीणा : अज्ञेय

कुछ रचनायें एक बार पढ़ते ही मन-मस्तिष्क पर इस कदर छा जातीं हैं कि उन्हें बार-बार पढ़ने की इच्छा होती ह...

शुक्रवार, 4 अप्रैल 2008
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हाँ मगर एक दिया, नाम है जिसका उम्मीद : क़ैफ़ी

क़ैफ़ी साहब की ज़िंदगी और शायरी को जानने की इस कोशिश के पिछले मुकाम पर हमने उनकी शायरी और संवादों से सजी कुछ चुनिंदा फिल्मों का ज़िक्र किया. आज ...

रविवार, 23 मार्च 2008
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सोमनाथ : धार्मिक- विद्वेष के खिलाफ़ क़ैफ़ी की आवाज़

होली की मस्ती के बाद, आइये एक बार फिर लौटते हैं क़ैफ़ी साहब की ज़िन्दगी और शायरी और ज़िन्दगी के अफ़साने की ओर. मुंबई पहुँचने के बाद क़ैफ़ी साहब न...

शुक्रवार, 21 मार्च 2008
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होली के रंग

होली के पर्व की यह विशेषता है कि यह हर व्यक्ति को अपने में समेट लेता है और उसे कुछ समय के लिये दुनिया के हर ग़म और चिंता से दूर एक आनंद-लोक म...

रविवार, 16 मार्च 2008
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औरत : आज सोचा तो आँसू भर आये (क़ैफ़ी आज़मी)

सुल्तानुलमदारिस में दाखिल होने के कुछ अर्से बाद ही कैफ़ी साहब ने वहाँ के छात्रों की एक कमेटी गठित की और अपनी कुछ माँगे व्यवस्था-समिति के सामन...

 
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